March 2025

  • Ramdev Ji Ki Aarti रामदेव जी की आरती

    पिछम धरां सूं म्हारा पीर जी पधारिया। घर अजमल अवतार लियो लाछां सुगणा करे थारी आरती। हरजी भाटी चंवर ढोले। पिछम धरां सूं म्हारा पीर जी पधारिया। गंगा जमुना बहे सरस्वती। रामदेव बाबो स्नान करे। लाछां सुगणा करे थारी आरती। हरजी भाटी चंवर ढोले। पिछम धरां सूं म्हारा पीर जी पधारिया। घिरत मिठाई बाबा चढे…

  • Ma Kalratri Ki Aarti  माँ कालरात्रि की आरती

    Ma Kalratri Ki Aarti माँ कालरात्रि की आरती

    कालरात्रि जय-जय-महाकाली । काल के मुह से बचाने वाली ॥ दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा । महाचंडी तेरा अवतार ॥ कालरात्रि जय-जय-महाकाली… पृथ्वी और आकाश पे सारा । महाकाली है तेरा पसारा ॥ खडग खप्पर रखने वाली । दुष्टों का लहू चखने वाली ॥ कालरात्रि जय-जय-महाकाली… कलकत्ता स्थान तुम्हारा ।सब जगह देखूं तेरा नजारा ॥ सभी…

  • Ramlala Ki Aarti रामलला की आरती

    आरती कीजे श्रीरामलला की । पूण निपुण धनुवेद कला की ॥ धनुष वान कर सोहत नीके । शोभा कोटि मदन मद फीके ॥ सुभग सिंहासन आप बिराजैं । वाम भाग वैदेही राजैं ॥ कर जोरे रिपुहन हनुमाना । भरत लखन सेवत बिधि नाना ॥ शिव अज नारद गुन गन गावैं । निगम नेति कह पार…

  • Shanidev Stuti  शनिदेव स्तुति

    Shanidev Stuti शनिदेव स्तुति

    नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठ निभाय च। नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम:॥ नमो निर्मांस देहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च। नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते॥ नम: पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णेऽथ वै नम:। नमो दीर्घाय शुष्काय कालदंष्ट्र नमोऽस्तु ते॥ नमस्ते कोटराक्षाय दुर्नरीक्ष्याय वै नम:। नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने॥ नमस्ते सर्वभक्षाय बलीमुख नमोऽस्तु ते। सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करेऽभयदाय च॥ अधोदृष्टे: नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोऽस्तु…

  • Shree Ramchandra Aarti  श्री रामचन्द्र आरती

    Shree Ramchandra Aarti श्री रामचन्द्र आरती

    आरती कीजै रामचन्द्र जी की। हरि-हरि दुष्टदलन सीतापति जी की॥ पहली आरती पुष्पन की माला। काली नाग नाथ लाये गोपाला॥ दूसरी आरती देवकी नन्दन। भक्त उबारन कंस निकन्दन॥ तीसरी आरती त्रिभुवन मोहे। रत्‍‌न सिंहासन सीता रामजी सोहे॥ चौथी आरती चहुं युग पूजा। देव निरंजन स्वामी और न दूजा॥ पांचवीं आरती राम को भावे। रामजी का…

  • Shree Bajrang Baan  श्री बजरंग बाण

    Shree Bajrang Baan श्री बजरंग बाण

    ॥ दोहा ॥ निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान। तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥ ॥ चौपाई ॥ जय हनुमंत संत हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥ जन के काज बिलंब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै॥ जैसे कूदि सिंधु महिपारा। सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥ आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात…

  • Shree Ram Raksha Strotam   श्री राम रक्षा स्तोत्रं

    Shree Ram Raksha Strotam श्री राम रक्षा स्तोत्रं

    श्रीगणेशायनम: । अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य । बुधकौशिक ऋषि: । श्रीसीतारामचंद्रोदेवता । अनुष्टुप्‌ छन्द: । सीता शक्ति: । श्रीमद्‌हनुमान्‌ कीलकम्‌ । श्रीसीतारामचंद्रप्रीत्यर्थे जपे विनियोग: ॥ ॥ अथ ध्यानम्‌ ॥ ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्दद्पद्‌मासनस्थं । पीतं वासोवसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्‌ ॥ वामाङ्‌कारूढसीता मुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं । नानालङ्‌कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचंद्रम्‌ ॥ ॥ इति ध्यानम्‌ ॥ चरितं रघुनाथस्य शतकोटिप्रविस्तरम्‌ । एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम्‌…

  • Shree Krishan Strotam  श्री कृष्ण स्त्रोतं

    Shree Krishan Strotam श्री कृष्ण स्त्रोतं

    ॥ पार्वत्युवाच ॥ भगवन् श्रोतुमिच्छामि यथा कृष्णः प्रसीदति । विना जपं विना सेवां विना पूजामपि प्रभो ॥1॥ यथा कृष्णः प्रसन्नः स्यात्तमुपायं वदाधुना । अन्यथा देवदेवेश पुरुषार्थो न सिद्ध्यति ॥2॥ ॥ शिव उवाच ॥ साधू पार्वति ते प्रश्नः सावधानतया श्रृणु! । विना जपं विना सेवां विना पूजामपि प्रिये ॥3॥ यथा कृष्णः प्रसन्नः स्यात्तमुपायं वदामि ते ।…

  • Shree Kartikeya Strotam  श्री कार्तिकेय स्तोत्र

    Shree Kartikeya Strotam श्री कार्तिकेय स्तोत्र

    स्कंद उवाच – योगीश्वरो महासेनः कार्तिकेयोऽग्निनन्दनः। स्कंदः कुमारः सेनानी स्वामी शंकरसंभवः॥1॥ गांगेयस्ताम्रचूडश्च ब्रह्मचारी शिखिध्वजः। तारकारिरुमापुत्रः क्रोधारिश्च षडाननः॥2॥ शब्दब्रह्मसमुद्रश्च सिद्धः सारस्वतो गुहः। सनत्कुमारो भगवान् भोगमोक्षफलप्रदः॥3॥ शरजन्मा गणाधीशः पूर्वजो मुक्तिमार्गकृत्। सर्वागमप्रणेता च वांछितार्थप्रदर्शनः ॥4॥ अष्टाविंशतिनामानि मदीयानीति यः पठेत्। प्रत्यूषं श्रद्धया युक्तो मूको वाचस्पतिर्भवेत् ॥5॥ महामंत्रमयानीति मम नामानुकीर्तनात्। महाप्रज्ञामवाप्नोति नात्र कार्या विचारणा ॥6॥